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Wednesday, August 10, 2022

हे ! राम … महात्मा गाँधी जी की जयंती पर विशेष व्यंग्य #Realviewnews

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हे ! राम …

महात्मा गाँधी जी की जयंती पर विशेष व्यंग्य

– वारीन्द्र पाण्डेय

कल रात अचानक बापू से मुलाक़ात हो गई , बोले पहचाना ? हमने कहा आप भी कमाल करते हो !!! बापू हो भाई..क्यों नहीं पहचानेंगे !!आजकल हम तुमको दिल में नहीं जेब में रख के घूमते हैं,रोज तुमको बेंचते हैं और तुम्हीं को ख़रीदते हैं, हम अपने दिल में भले ही ना झाँके लेकिन जेब में ज़रूर झाँक लेते हैं । इसलिए तुम्हारी याद बनी रहती है । बापू बोले अच्छा ये बताओ मेरे करघे का इस्तेमाल करते हो ? मैं थोड़ी मराठी जानता हूँ उनकी बात सट्ट से समझ में आ गई “घे” मतलब “ले”.. मैंने कहा बिलकुल,सरकार कर घे घे के मस्त है और हम “कर” दे दे के पस्त हैं। बापू बोले अरे कर नहीं रे, करघा मतलब “चरख़ा” .. चरख़ा चलता है ? मैंने कहा sorry बापू पूरे देश में तो नहीं लेकिन भारत के एक प्रांत में जहाँ से तुमने अपना आंदोलन शुरू किया था ना वहाँ पे ज़रूर चारा खाया जाता है। वे ठुनक गए , बोले मैं चारा खा नहीं चरख़ा बोल रहा हूँ .. चरख़ाऽऽऽ । बात समझ में नहीं आती तुम्हारी ? मैं बोला कैसी बात करते हैं बापू चरख़ा तो हमारा मूल मंत्र है पूरा देश ही मन लगा के चर”खा” रहा है । वे थोड़े बुझ से गए, फिर बोले और खादी ? खादी का क्या हुआ ?बापू आज़ादी के बाद हमने खादी के नहीं, आबादी के प्रडक्शन पे ज़्यादा ध्यान दिया है । खादी पहनने से बादी बढ़ती है इसलिए आम जन उसका प्रयोग नहीं करते।उन्होंने नाराज़गी भरे स्वर में मुझ से कहा रिश्वत लेना अन्याय है। मैंने कहा था…तुम लोग उसको भी भूल गए होगे ? मैंने ज़ोर से कहा बिलकुल नहीं.. रिश्वत लेना अन्य आय इस कल्याणकारी मंत्र का हम अक्षरश: पालन करते हैं आपको मुझ जैसे सामान्य जन पर विश्वास नहीं है लेकिन जनतंत्र पर तो पूरा विश्वास है जिसे लाने के लिए आपने अपनी जान लड़ा दी , तो जनतंत्र में बैठे हुए अपने किसी भी बच्चे से पूछ लीजिए वह मेरी बात की सत्यता प्रमाणित करेगा और कहेगा कि रिश्वत लेना अन्य “आय” है । बापू भावुक हो गए बोले मेरी टोपी ? मैंने कहा उसे क़ुली और डिब्बे वाले पहनते हैं क्योंकि तुमको किसी ने क़ुली कह के पुकारा था ना इसलिए उसपे उनका कॉपी राइट है .. तुम्हारी घड़ी हमारे समय के हिसाब से नहीं चलती ,तुम्हारे चश्मे से अब हमें दिखाई नहीं देता ये dono ही आउटदेटेड हो चुके हैं। इसलिए हम इनका इस्तेमाल नहीं करते । लेकिन चिंता मत करो हमने तुम्हारे चश्मे के फ़्रेम को बचा लिया है जिसमें हम अपनी इच्छानुसार काँच बदलते रहते हैं .. हम जो भी देखना चाहते हैं उसमें दिखाई देता है, देखे गए दृश्य को या अपने विचारों को हम “तुम्हारे नाम से” प्रचारित करते हैं क्योंकि फ़्रेम तुम्हारा है ना!! और सबसे बड़ी बात की हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं आख़िर तुम हमारे राष्ट्रपिता हो भई!! मैंने पूछा लेकिन तुम यहाँ कैसे ? बोले आज २ अक्टूबर है । मैंने कहा ओ हाँ ड्राई डे छुट्टी का दिन ..बोले आज मेरा जन्मदिन है बेटे.। धत्त तेरे की मैं तो भूल ही गया happy bud de बापू । अभी बोलो मैं तुम्हारी क्या सेवा करूँ ? आज तो कहीं मिलेगी भी नहीं । नहीं तो ख़ूब धमाल करते .. वैसे जुगाड़ है तुम्हारा फ़ोटो मेरी जेब में है उसको खाखी भंडार में दे दूँ तो नदियाँ बह जाएगी क़सम से …लोग तुमको बहुत प्यार करते हैं तुम्हारे लिए ड्राई डे की भी एसी की तैसी।बापू मैं तुमको थैंक यू बोलना चाहता हूँ। जब से तुमको जेब में रख के घूमता हूँ तब से खादी हो खाखी हो काली कोट कोई भी हो । मेरा कोई काम नहीं रुकता किसी के बाप का डर नहीं है मुझे ..अपना बापू अपने पास,डरने की क्या बात,ये सारी दूनिया ख़ासमखास । माँ क़सम बहुत वज़न है तुम्हारा। लेकिन ग़रीब की अभी भी लगी पड़ी है क्योंकि उसके पास जेब ही नहीं है, वो तुमको रखेगा कहाँ? बापू को ग़ुस्सा आ गया बोले अगर मैंने अहिंसा का व्रत ना पाला होता तो आज तेरे कान के नीचे बजाता बकवास बंद कर और बता ये देश चलता कैसे है ? मैं बोला राम भरोसे .. क्योंकि मरते हुए तुम “हे राम” बोले थे .. हम समझ गए की अब से राम ही हैं जिनपे हमें भरोसा करना है । और हमारा भरोसा सत्य साबित हुआ, सब एकदम चका चक है ।
तुलसी बिरछा बाग़ के सिंचत से कुम्हलाएं।
राम भरोसे जो रहें वे पर्वत पे हरियाएँ ।।

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