10.1 C
Delhi
Tuesday, January 25, 2022

स्व. डा. शम्भु नाथ सिंह की प्रसिद्धतम गीत रचना : समय की शिला पर… #Realviewnews

जरूर पढ़े

विधान सभा चुनाव 2022 : क्यों सुर्खियों में है जौनपुर की जाफराबाद सीट #Realviewnews

स्पेशल रिपोर्ट - वारीन्द्र पाण्डेय  जौनपुर, रियल व्यू न्यूज । गंगा जमुनी तहजीब को अपने अंतस्थल में समेटे पूर्वांचल का...

यूपी टीईटी परीक्षा : दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने आये दो आरोपी चढ़े एसटीएफ के हत्थे #Realviewnews

जौनपुर । टीइटी में इस बार दूसरे के स्‍थान पर परीक्षा देने वालों और डिवाइस से नकल करने वालों...

मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा विधायक ने दी सफाई, बोले पुरानी फोटो की गई वायरल #Realviewnews

जौनपुर । आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन में जिले के बदलापुर के भाजपा विधायक रमेशचंद्र मिश्रा समेत दो लोगों...

शम्भुनाथ सिंह समकालीन कविता के सशक्त हस्ताक्षर है । एक ऐसे प्रातिभ रचनाकर, जिन्होंने साहित्य की प्रायः सभी विधाओं को अपने लेखन से समृद्ध किया है । कविता विशेषतः गीत कविता को युग सापेक्ष नवीनता से भरकर उसे पारम्परिकता से बाहर निकालने और टटका बना देने में शम्भुनाथ जितनी सफलता उनके समकालीन किसी अन्य रचनाकार को नहीं प्राप्त हुई । सच कहा जाय तो कविता को नयी कविता बना देने में जो योगदान अज्ञेय का है, वही योगदान शम्भुनाथ सिंह का गीत को नवगीत बना देने में है ।
प्रस्तुत गीत में समय एक चित्रपट है । इस चित्रपट पर सृष्टि सौंदर्य के अनेक चित्र बनते मिटते रहते है । यें चित्र जब समय की शिला पर निर्मित होते है, तो दुरुहता अन्योन्याश्रित हो जाती है, क्योंकि यह शिला अत्यंत ही कठिन है । इसलिए इस पर बनने वाला चित्र भी कड़ी चोट और दर्द की अनेक अनुभूतियों से उत्सर्जित होकर कठिनाई से बनता है ।

समय की शिला पर मधुर चित्र कितने
किसी ने बनाये, किसी ने मिटायें !

किसी ने लिखी आंसुओं से कहानी
किसी ने पढ़ा किंतु दो बूंद पानी
इसी में गयें बीत दिन जिंदगी के
गयी घुल जवानी गयी मिट निशानी

विकल सिंधु से साध के मेघ कितने
धरा ने उठाये, गगन ने गिराये !

शलभ ने शिखा को सदा ध्येय माना
किसी को लगा यह मरण का बहाना
शलभ मिट न पाया शलभ जल पाया
तिमिर में उसे पर मिला क्या ठिकाना

प्रणय पंथ पर प्यार के दीप कितने
मिलन ने जलायें विरह ने बुझायें !

जलधि ने गगन चित्र खींचे नयन में
उतरती हुयी उर्वशी देख घन में
अचल किंतु चलचित्र वे हो न पायें
कि सहसा बुझी रूप की ज्योति क्षण में !

जलद पत्र पर इंद्रधनु रंग कितने
किरण ने सजायें पवन ने उड़ाये !

भटकती हुई राह में वंचना की
रुकी श्रान्त हो जब लहर चेतना की,
तिमिर आवरण ज्योति का वर बना जब
की टूटी तभी शृंखला साधना की ।

नयन प्रण में रूप के स्वप्न कितने
निशा ने जगाये, उषा ने सुलाये !

सुरभि की अनिल – पंख पर मौन भाषा
उड़ी वंदना की जगी सुप्त आशा,
तुहिन-बिंदु बन कर बिखर पर गये स्वर

किसी के चरण पर वरण फूल कितने
लता ने चढ़ाये, लहर ने बहाये !
समय की शिला पर मधुर चित्र कितने,
किसी ने बनाये, किसी ने मिटाये !

( साभार – स्व. डा. शंभूनाथ सिंह की गीति रचना से )

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

पॉपुलर

शिक्षा को अवसर में बदलने की चुनौती #Realviewnews

रीयल व्यू न्यूज ।  (शिक्षक दिवस पर आमंत्रित लेख)   लेख - अनिल यादव ( मैनेजमेंट गुरु )   लंबे अरसे के बाद आई...

अन्य

मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा विधायक ने दी सफाई, बोले पुरानी फोटो की गई वायरल #Realviewnews

जौनपुर । आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन में जिले के बदलापुर के भाजपा विधायक रमेशचंद्र मिश्रा समेत दो लोगों के खिलाफ शनिवार को मुकदमा...

डीएम ने दिखाया मतदाता जागरूकता एक्सप्रेस को हरी झंडी #Realviewnews

जौनपुर। मतदाताओं का जागरूक करने के लिए शनिवार को डीएम मनीष कुमार वर्मा ने मतदाता जागरूकता एक्सप्रेस को कलेक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर...

जीडी मेमोरियल यांकर्स पब्लिक स्कूल में दिया गया योग का मंत्र #Realviewnews

रिपोर्ट - अखिलेश कुमार मिश्र लालगंज , आजमगढ । स्थानीय ब्लाक अंतर्गत जी.डी. मेमोरियल यांकर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल में भारतीय तिब्बत पुलिस बल के साथ...

स्वास्थ विभाग की लापरवाही, बिना वैक्सीन लगवाये ही मोबाइल पर आ गया वैक्सीनेटेड का मेसेज #Realviewnews

जौनपुर, रियल व्यू न्यूज । स्वास्थ्य विभाग द्वारा फर्जी कोरोना टीका लगाने का मामला थमने का नाम नही ले रहा है। शुक्रवार को एक...
- Advertisement -

खबरे आज की

More Articles Like This