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Thursday, August 4, 2022

निराश क्यूं है : सड़क किनारे टेंटों में बिकती है मर्दाना ताकत #Realviewnews

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नववर्ष आपके जीवन में नयी खुशियां, नये उमंग लाए, इन्हीं कामनाओं के साथ…, शिवबालक यादव ग्रा. प्रधान ( हरिहरपुर ), डोभी, जौनपुर ।

रियल व्यू न्यूज, जौनपुर । नीम – हकीम से लेकर अंग्रेजी डाक्टर तक सभी गुप्त रोग, मर्दाना ताकत व कमजोरी के नाम पर सीधे साधे लोगों की जेबें ढीली कर रहें है । हद तो तब हो जाती है, जब सड़क किनारे फटे पुराने तम्बू लगाकर बंजारा सामुदाय के लोग औने पौने दामों में शरीरिक कमजोरी कों छू मंतर कर मर्दाना ताकत बेचते है । खानदानी हकीम होने का दावा करने वाले यें लोग शिलाजीत के नाम पर कोयला खिला देते है । प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही नीम हकीमों की आंखों देखी ।

निराश क्यूं है : सड़क किनारे टेंटों में बिकती है मर्दाना ताकत #Realviewnews

मर्दाना ताकत बढ़ाएं… निराश रोगी एक बार हमसे जरूर मिलें… दीवारों पर बड़े अक्षरों में चस्पा इस तरह के विज्ञापन गाहे-बगाहे आपका ध्यान खींचते ही होंगे। मर्दाना ताकत और यौन क्रिया एक ऐसा विषय है, जो सामाजिक रूप से जितना वर्जित किया गया उतना ही चर्चित रहा है। ठीक उसी तरह जैसे… जब-जब प्यार पे पहरा हुआ है, प्यार और भी गहरा हुआ है। खैर, विज्ञापन पर लौटते हैं। इस तरह के विज्ञापन अपने पर्दे, बोर्ड और गाड़ी की तख्ती पर चस्पा किये तमाम तथाकथित खानदानी वैद्य और हकीम शहर के फुटपाथ पर आजकल टेंट लगाकर मर्दाना ताकत बेच रहे हैं। वैसे तो हर मर्ज का शर्तिया इलाज (फायदा भगवान जाने) का इलाज इनके पास होता है, लेकिन न बताई जाने वाली बीमारियों के यह स्पेशलिस्ट होते हैं।

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आइए, आपको एक ऐसे ही टेंट में ले चलते हैं। कोई देख न ले, इस आशंका से मैं दाएं-बाएं देखते हुए एक साथी के साथ टेंट में घुसा। सर्वधर्म समभाव प्रदर्शित करते तमाम धार्मिक चित्रों के बीच-बीच कांच के जारों में जड़ी-बूटियां सजी हुई थीं। ग्राहक देखते ही ‘वैद्य’ का खूबियों का बखान करते लाउडस्पीकर की आवाज धीमी होती है। एक दस-बारह साल का लड़का चिल्लाता है दद्दा…। टेंट में चारपाई पर उनींदे से लेटे शख्स की आंखों में ग्राहक देखते ही चमक पैदा होती है। उसके करीब आते की टेंट में फैली धूपबत्ती की महक हल्की हो जाती है, क्योंकि गांजे की महक तो अपने आगे किसी को टिकने नहीं देती।

मैं कुछ सोच पाता, इससे पहले ही कानों में आवाज गूंजती है…बाबू नाड़ी देखने का बीस रुपया और दवा का अलग से पड़ेगा। स्वीकृति में सिर हिलते ही मेरे साथी की कलाई उनके हाथ में थी। मर्दाना कमजोरी की घोषणा करते हुए उन्होंने तीन-चार तरह के पैकेज बता दिए। बोले, मर्ज पुराना हो जाता है तो एक साल दवा खानी पड़ती है। तीन महीने और छह महीने का भी पैकेज है। बोले, फिलहाल 15 दिन की दवा 2500 में ले जाओ। पैसे कम होने की वजह बताने पर बोले- तीन सौ रुपये में एक दिन की दवा ले जाओ, फायदा हो तो कल आना। मैंने पूछा, आपने कहां से इलाज सीखा? वैद्यजी बोले, दादा-परदादा के जमाने से यह काम है, जड़ी बूटियों की पहचान बचपन से ही कराई जाती है। पहाड़ों में जाकर दवा खोजनी पड़ती है। ज्यादा पूछताछ करने पर चेहरे पर नाराजगी के भाव उभरे और लहजा तल्ख हो गया। कहने लगे… जाओ अंगरेजी डॉक्टरों से लुटवाओ पैसा।

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उच्च शिक्षा का बेहतर शिक्षण संस्थान, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध

आचार्य बलदेव ग्रुप आफ इन्स्टिट्यूशन, कोपा, पतरही, जौनपुर । 

प्रबंधक – अनिल यादव मैनेजमेंट गुरु 

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