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Wednesday, February 1, 2023

जिला अस्पताल में महिला की मौत, हंगामा कर रहे लोगों पर बरसी लाठियां #Realviewnews

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रिपोर्ट – राहुल मिश्रा/अखिलेश कुमार मिश्र

आजमगढ़ ।  जिला अस्पताल परिसर में मंगलवार की शाम उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब एक महिला की डॉक्टर के न मिलने के चलते मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। हंगामे की सूचना पर कोतवाल पहुंचे तो परिजन उनसे भी भिड़ गए, जिस पर कोतवाल ने फोर्स बुला लिया और लाठियां भांज कर भीड़ को कंट्रोल किया। इस दौरान पुलिस की लाठी से मृतका के परिवार की एक महिला भी घायल हो गई। जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कप्तानगंज कस्बे की रहने वाली 50 वर्षीय अनिता जायसवाल पत्नी विनोद जायसवाल हृदय रोगी थी। उसकी तबीयत खराब होने पर परिजनों ने उसे जिला मुख्यालय स्थित एक प्राइवेट अस्पताल पर भर्ती कराया था। । मंगलवार की शाम प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने महिला की हालत गंभीर होने पर रेफर कर दिया। इस पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
जिला अस्पताल में महिला को देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं था। इसी दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत होते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। अस्पताल पर हंगामे की जानकारी होते ही शहर कोतवाल केके गुप्ता मयदल बल मौके पर पहुंच गए। कोतवाल मृतका के परिजनों को समझा रहे थे लेकिन वे कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। इसी दौरान परिजनों की कोतवाल से कहासुनी और हाथापाई भी हो गई। इसके बाद कोतवाल ने पीएसी के जवानों को बुला कर हंगामा कर रहे लोगों पर लाठियां फ टकरवा दीं। इससे भीड़ तो छंट गई लेकिन मृतका के परिवार की एक महिला रिया जायसवाल घायल हो गई। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में ही भर्ती कराया गया है।

वही मृतका के शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शहर कोतवाल केके गुप्ता ने बताया कि महिला की मौत के बाद परिजन ज्यादा आक्रोशित हो उठे थे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को सड़क पर ले जाकर जाम करने की बात कह रहे थे। परिजनों के हंगामे को देखते हुए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद शव पीएम के लिए मर्चरी में रखवा दिया गया। मौके पर पुलिस अभी भी तैनात है।

इस बाबत एसआईसी जिला मंडलीय अस्पताल डॉ. एसकेजी सिंह का कहना है कि ” मरीज गंभीर हाल में लाई गई थी। डॉ. रामकेवल ने उसे एडमिट किया था और फिर डॉ. राजनाथ ने उसे देखा था और हालत गंभीर बताते हुए रेफर भी कर दिया था। इसी दौरान डॉ. कुशवाहा भी वहां पहुंच गये। उन्होंने मरीज को जब देखा तो उसी मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिजनों ने डॉ. कुशवाहा के साथ मारपीट की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए। अस्पताल प्रशासन ने इलाज में कोई लापरवाही नहीं की और एक नहीं तीन-तीन डॉक्टरों ने मरीज को देखा था। डॉक्टर के न मिलने व लापरवाही का आरोप सरासर गलत है । ”

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