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Wednesday, August 10, 2022

जाने ! जो मनोकामना देवता पूर्ण नही कर पाते,उसे पितृ पूरा कर देते हैं। #Realviewnews

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पंडित संदीप दूबे

रीयल व्यू न्यूज, ( ज्योतिष डेस्क ), वाराणसी ।  शास्त्रों में हरिद्वार को देव भूमि के कहा गया हैं । ऐसा जगह जगह धार्मिक कथाओं में भी वर्णित हैं । इस देव भूमि पर पूजा – पाठ करने से मनुष्य की है मनोकामनाएं जल्द ही पूरी हो जाती है। पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करने के लिए हरिद्वार सर्वश्रेष्ठ भूमि है । यहां की गई श्राद्ध पूजा विशेष फलदायी होती है। जिससे पितृगण अति प्रसन्न होकर अपने वंशजों का कल्याण देवताओं से भी अधिक करते हैं । पितृपक्ष या श्राद्ध एक हिंदू धार्मिक समारोह है जिसमें लोग अपने पूर्वजों को जलांजलि एवं उत्तम पकवानों का भोग चढ़ाते हैं । और अपने पितरों को आदर भाव से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वर्ष 2020 में श्राद्ध की तिथियां क्रमशः 1 सितंबर से 17 सितंबर तक हैं । महालया पक्ष की यह अवधि, अपरा पक्ष के रूप में भी जानी जाती है। दक्षिण तथा पश्चिम भारत में, यह श्राद्ध भाद्रपद के हिंदू चंद्र महीने के दूसरे पक्ष तथा अनंत चतुर्दशी या यूं कहे गणेश विसर्जन के पखवाड़े में मनाया जाता है।
हिंदुओं द्वारा पितृपक्ष को बहुत शुभ माना जाता है। तर्पण का अनुष्ठान करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय होता है। ‘तर्पण’ वर्तमान पीढ़ी द्वारा पितरों को याद करने का महापर्व है।’तर्पण’ पूर्वजों के साथ संचार करने एवं उनकी पूजा का एक तरीका है। ‘ गरुड़पुराण ‘ में कहा गया है कि पितृपक्ष में अपने वंशजों द्वारा अर्पण कीये गये श्राद्ध एवं तिलांजलि को पाकर पितृगण एक साल के लिए पितृलोक में निवास को चले जाते हैं। ऐसी मान्यता हैं कि पितृपक्ष में आप के पितृगण पृथ्वी पर इस लिए आते हैं। ताकि उन्हें पता चल सके कि वे अभी भी पूज्यनीय तथा परिवार का एक अभिन्न हिस्सा हैं । श्राद्ध पूजन के माध्यम से आप जानें – अनजानें में किए गए अपने भूल के लिए अपने पितरों से क्षमा भी मांगते है। यह पूजा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे सबसे उत्तम मार्ग है। इस पूजा से प्रसन्न होकर पूर्वज अपने वंशजों को धन, समृद्धि तथा यश और कीर्ति से भर देते हैं । ऐसी मान्यता हैं कि जो कार्य देवता नही कर पाते पितृ उसे भी पूर्ण कर देते हैं ।

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